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पश्चिम प्रदेश आंदोलन के लिए दलितों वंचितों का साथ जरूरी:: विरेन्द्र चौधरी

 वनवासी आदिवासी दलित वंचितो से भगवान श्रीराम ने जीती थी जंग••आदिवासी वनवासी दलितों और वंचितों का आंदोलन में साथ जरूरी:--विरेन्द्र चौधरी 

डी पी सिंह/अतुल शर्मा 

मेरठ।जब तक दलितों वंचितों का साथ नहीं लोगे तब तक पश्चिम प्रदेश निर्माण मुश्किल होगा। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने दलितों वंचितों का साथ लेकर लंका विजय करी। इससे बड़ा उदाहरण नहीं हो सकता। ये बात हमारे संवाददाता डीपी सिंह व अतुल शर्मा से वार्ता करते हुए आंदोलनकारी विरेन्द्र चौधरी पत्रकार ने कही।

पश्चिम प्रदेश निर्माण के प्रबल प्रहरी व आंदोलनकारी विरेन्द्र चौधरी पत्रकार ने कहा जब भगवान राम ने अयोध्या छोड़ी तो दलित वंचित केवट का सहारा लिया, वनवासी आदिवासी श्री हनुमान, वंचित सुग्रीव, जटायु,नर नील और शबरी का आर्शीवाद लिया। छोटी-छोटी ताकतों को लेकर एक बड़ी ताकत लंकापति का वध करके साबित किया,जब तक आदिवासी, दलित, वंचित और वनवासी आपके साथ नहीं है,तब तक लड़ाई जीतना आसान नहीं है।

विरेन्द्र चौधरी पत्रकार ने पृथक पश्चिम प्रदेश निर्माण के लिए आंदोलित सामाजिक संगठनों को राय देते हुए कहा  सभी संगठन अधिकतर अगड़ी जातियों को लेकर बैठके कर रहे हैं।जो सम्पन्न है,वो बैठक के बाद भी उदासीन बनें रहते हैं। आंदोलनकारियों को वनवासी, आदिवासी, दलित और वंचितों को उनके अधिकारों के हनन के बारे में बताना होगा। उन्हें बताना होगा कि पृथक पश्चिम प्रदेश बनने के बाद उनके पारिवारिक और सामाजिक जीवन में क्या विकास आयेंगे। जिस दिन ये बात उनकी समझ में आ जायेगी उस दिन लड़ाई आसान हो जायेगी।

विरेन्द्र चौधरी ने कहा ये बात मैं इस लिए कह रहा हुं,जब भगवान श्री राम अयोध्या से निकले तो अयोध्या से लंका तक कितने राजा होंगे, कितने ऊंची जाति के लोग होंगे, लेकिन उन्होंने उनसे मदद नहीं मांगी। क्योंकि उन्हें पता होगा,ये अपने अपने स्वार्थों में लीन हैं। अगर कोई तन मन  से खड़ा होगा तो वंचित और दलित ही हो सकता है। विरेन्द्र चौधरी पत्रकार ने सभी आंदोलनकारियों से अपील की कि वे पृथक पश्चिम प्रदेश निर्माण के लिए दलित और वंचितों की बस्तियों में जायें तो निश्चित तौर पर लड़ाई आसान हो जायेगी।

उन्होंने कहा हो सकता है आप मुझे पागल समझे। लेकिन आप चिन्तन करें और देखें कितने लोगों ने पद लेने के बाद काम किया,कितने लोगों ने कितने-कितने लोग जोड़े, कितने लोगों ने नारे लगाए। अब आपको सोचना है आपको क्या करना है,मेरी जो समझ में आया मैंने कह दिया।


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