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मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया से बचाव एव रोकथाम के लिए क्या करें

 मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया से बचाव एव रोकथाम के लिए दिया गया प्रशिक्षण•√आशाएं अपने-अपने क्षेत्र में भ्रमण कर घरों में रूके हुए पानी को खाली कराएं

विरेन्द्र चौधरी/वीरेंद्र भारद्वाज 
सहारनपुर। जिलाधिकारी डॉ0 दिनेश चन्द्र के निर्देशों के क्रम में एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा0 संजीव मांगलिक के मार्गदर्शन में में नेशनल वैक्टर बोर्न डिजीज कन्ट्रोल प्रोग्राम के अर्न्तगत डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया आदि की रोकथाम के लिए टी0बी0 सेनेटोरियम हॉल में आशा, एल0टी0, स्वास्थ्य पर्येवेक्षक के संवेदीकरण एवं दक्षता स्तर में सुधार हेतु प्रशिक्षण का आयोजन संचालित किया जा रहा है। मंगलवार को ब्लॉक-नागल़, सहारनपुर की 44 आशाओं, 04 ए0एन0एम0, 02 बी0एच0डब्लू0 व स्वास्थ्य पर्यवेक्षक कुल-50 प्रतिभागियों का संवेदीकरण किया गया। कुल अब तक 528 आशा, 48 ए0एन0एम0, 24 बी0एच0डब्लू0 व स्वास्थ्य पर्यवेक्षक के 600 प्रतिभागियों का संवेदीकरण किया गया। जिसमें मलेरिया एवं वेक्टर जनित रोगों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके। शिवॉका गौड जिला मलेरिया अधिकारी, मनोज कौशिक एस0एम0आई0, गौरव वर्मा एम0आई0, संगीता भारती एम0आई0 राजेश रोहिला डी0ई0ओ0 आदि द्वारा एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया जिसमें ब्लॉक स्तर से आशा, आशा संगिनी, को प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें आशा को बताया गया कि क्षेत्र में जाकर रक्तपटिट्का बनाकर 24 घण्टे के अन्दर स्वास्थ्य केन्द्र या ए0एन0एम0 को उपलब्ध कराने पर 15 रूपये प्रति रक्त पटिट्का तथा मलेरिया रोगियो का पूर्ण उपचार कराने पर प्रति रोगी 200 रूपये दिये जायेगे तथा डेंगू एवं चिकनगुनिया आदि की रोकथाम हेतु उनके द्वारा वेक्टर जनित स्रोतों को कम करने के लिये प्रोत्साहन राशि रूपये 200 प्रतिमाह हेतु माह जुलाई से माह नवम्बर तक दी जायेगी।
श्रीमती शिवॉका गौड जिला मलेरिया अधिकारी द्वारा प्रशिक्षण में मलेरिया ,डेंगू, चिकनगुनिया आदि से बचाव एव रोकथाम हेतु जानकारी दी गयी। आशाओं को अपने-अपने क्षेत्र में रक्त पटिट्काये बनाये जाने के लिये उन्हे प्रशिक्षण दिया जिससे उनके क्षेत्र में बुखार के प्रकार का पता लगा सके ताकि उस क्षेत्र में कार्यवाही की जा सके। आशाओं को जानकारी की दी गयी कि वे अपने-अपने क्षेत्र में भ्रमण कर घर-घर जाकर पानी से भरे बर्तन जैसे कूलर, गमले, छतो पर रखे पुराने टायर, फ्रिज की टेª आदि जिनमें एक सप्ताह से ज्यादा पानी रूका रहता है उन्हंे खाली कराये क्योकि इन्ही बर्तनों में एडिज लार्वा प्रजनन करता है। डेंगू की रोकथाम हेतु विशेशतौर पर कूलरों में पानी भरने से पहले अच्छी तरह उसकों रगडकर साफ किया जाये जिससे डेंगू फैलाने वाले मच्छर एडिज का विगत वर्श का अण्डा मर जाये क्योकि यह अण्डा एक साल तक कूलरों में जमा रहता है व पानी के सम्पर्क में आने पर यह एडिज मच्छर बन जाता है।

मलेरिया/डेंगू के लक्षण होने पर क्या करेंः-  तेज बुखार होने पर पैरासीटामोल की गोली ले सकते है। ठण्डे पानी से शरीर को पोछे। डेंगू उपचार के लिये कोई खास दवा अथवा बचाव के लिये कोई वैक्सीन नही है। औशधियों का सेवन चिकित्सकों की सलाह से करें।  गंभीर मामलों के लक्षण जैसे (खून आना) होने पर चिकित्सालय में तुरन्त सम्पर्क करें। एसप्रीन व स्टीराइड दवाईयों का सेवन कदापि नही करें। डेंगू रोगी को मच्छरदानी का प्रयोग अवश्य कराये।
ध्यान रखेंः- डेंगू रोग को फैलाने वाला मच्छर शहरी, अर्ध शहरी आबादी वाले मकानों में पाया जाता है, गन्दी नालियों में यह मच्छर नही रहता है, यह मच्छर घरों में साफ इक्ठठा पानी में अपने अण्डे देता है। घरों के अन्दर ये पानी कूलर, छत पर खुली टंकियॉ, टीन के खाली डिब्बे, पुराने टायर, गमले, खाली बोतलें, सिर्स्टन, मनी प्लान्ट के गमले आदि में जहॉ पर पानी अस्थाई रूप से एकत्रित रहता है वही पर प्रजनन कर अपनी संख्या बढाता है।

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