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बेहद दुःखद :: 19 जनवरी को योगी सरकार ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश को हाईकोर्ट बैंच देने के लिए कार्यवाही हेतु लिखी चिट्ठी 20 जनवरी को फैसला पलटा

 बेहद दुःखद :: 19 जनवरी को योगी सरकार ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश को हाईकोर्ट बैंच देने के लिए कार्यवाही हेतु लिखी चिट्ठी 20 जनवरी को फैसला पलटा••••पूरब ने हमारे साथ अन्याय किया हमेशा हमें चला - अधिवक्ता कुंवरपाल शर्मा, अधिवक्ताओं को हमारे साथ आकर बैंच नहीं पूरे प्रदेश की मांग करनी चाहिए - विरेन्द्र चौधरी 

विरेन्द्र चौधरी

लखनऊ/सहारनपुर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को हाईकोर्ट देने का फैसला कर २४ घंटो में उत्तर प्रदेश सरकार ने अपना फैसला वापस ले लिया। ये पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए बेहद दुःखद और बुरी खबर है।सनद रहे दशकों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ता हाईकोर्ट बैंच के लिए हर शनिवार को काम बंद रखते है। लेकिन प्रयागराज के अधिवक्ता हाईकोर्ट बैंच का पुनर्गठन पर विरोध करते है।
दैनिक अखबारों में प्रकाशित खबर के अनुसार योगी सरकार ने पश्चिम को हाईकोर्ट देने की पहल करते हुए कार्यवाही शुरू कर दी थी, फिर २४ घंटो में ही सरकार ने फैसला पलट दिया। जानकारी के अनुसार 19 जनवरी को उत्तर प्रदेश सरकार के न्याय विभाग के विशेष सचिव बालकृष्ण एन रंजन ने हाईकोर्ट के महाप्रबंधक को पत्र लिखकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश को हाईकोर्ट देने के लिए कार्यवाही शुरू करने को कहा था। 20 जनवरी को विशेष सचिव न्याय बालकृष्ण एन रंजन ने जारी पत्र पर रोक लगाने का पत्र जारी कर दिया। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं व वादकारियों में हताशा और आक्रोश उत्पन्न हो रहा है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश केंद्रीय संघर्ष समिति के चैयरमैन कुंवर पाल शर्मा ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता हमेशा छली गई है, हमारे साथ हमेशा अन्याय होता रहा है। सरकारें अपने राजनीतिक लाभ के लिए हमारे साथ धोखा करती रही है।
आपको बताते चले कि प्रयागराज हाईकोर्ट पश्चिम प्रदेश से 700 से 800 किमी दूर है, इतनी दूरी होने के कारण अपने वादो के निस्तारण के लिए प्रयागराज जाना मुश्किल काम है,जिसका पूरा फायदा हाईकोर्ट के अधिवक्ता उठाते है। यही कारण है कि पश्चिम में हाईकोर्ट जाने का वहां के अधिवक्ता विरोध करते है। पूरब का राजनीतिक दबदबा होने के कारण ही पश्चिम को आजतक हाईकोर्ट बैंच नहीं मिल सकी।
पश्चिम प्रदेश के लिए आंदोलित पश्चिम प्रदेश निर्माण संयुक्त मोर्चा के प्रवक्ता विरेन्द्र चौधरी पत्रकार ने कहा कि ये हमारा दुर्भाग्य है कि पश्चिम का आदमी हाईकोर्ट बैंच को अधिवक्ताओं की मांग समझता है, जबकि असली जरूरत वादकारियों की है। अधिवक्ताओं की मांग का हर वादकारी को समर्थन देते हुए हड़ताल में शामिल होना चाहिए। उन्होंने कहा अधिवक्ताओं को भी पश्चिम प्रदेश निर्माण संयुक्त मोर्चा का साथ देना चाहिए।जब नया राज्य बनेगा तो विधानसभा, हाईकोर्ट के साथ साथ सारे मुख्यालय पश्चिम प्रदेश में आ जायेगें।

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