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अनन्त कोटि पुण्यों और यज्ञों का फल देता है एक रुद्राक्ष का पौधा रोपण - आचार्य महामंडलेश्वर सन्त कमलकिशोर, विश्व में उत्पन्न होने वाले सभी रोगों की महौषधि है रुद्राक्ष का पौधा - महामंडलेश्वर अनिल कोदण्ड श्यामसखा

 


विरेन्द्र चौधरी 

सहारनपुर।महाशिवरात्रि एवं त्रयोदशी के पवित्र अवसर पर आज दीपांशु कॉलेज के प्रांगण में दिव्य शक्ति अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर सन्त कमल किशोर जी के सान्निध्य एवं महामंडलेश्वर अनिल कोदण्ड श्यामसखा तथा प्रसिद्ध भागवताचार्य उद्धव कोदण्ड के निर्देशन में 11 रुद्राक्ष के पौधों का रोपण किया गया।

इस अवसर पर रुद्राष्टाध्यायी के मंत्रों का उच्चारण कर सन्त कमल किशोर ने रुद्राक्ष और शिवलिङ्ग के प्रति फैली इस भ्रांति को गलत बताते हुए कहा कि इसे “शूद्र अथवा स्त्रियाँ न पूजा कर सकती हैं और न धारण कर सकती हैं” शिव पुराण में विद्येश्वर संहिता का उदाहरण देते हुए उन्होने कहा कि शिवलिङ्ग की पूजा और रुद्राक्ष धारण का अधिकार किसी भी वर्ण के पुरुष अथवा स्त्री को समान रूप से भगवान शिव द्वारा प्रदत्त है। रुद्राक्ष धारी मनुष्य को अपने खान-पान में मदिरा, मांस, लहसुन, प्याज, सहिंजन,लसोड़ा इन सब का त्याग करना आवश्यक है। सभी प्रकार के विषों को नष्ट करने वाले पेड़ों में बिल्व, दूर्वा, गिलोय और रुद्राक्ष में सबसे श्रेष्ठ रुद्राक्ष का पेड़ ही माना जाता है। । 

महामंडलेश्वर अनिल कोदण्ड श्यामसखा ने रुद्राक्ष धारण विधि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मनुष्य को केवल एक मुखी या पंचमुखी रुद्राक्ष को ही धारण करना चाहिए। शेष मुखी रुद्राक्ष को केवल विरक्त सन्यासी जिन्होंने गृहस्थ आश्रम को त्याग दिया है, वही पहन सकते हैं। रुद्राक्ष की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि रुद्राक्ष की माला जपते हुए रुद्राक्ष पर उभरे हुए कंटक हृदय की गति और ब्लड प्रैशर को नियमित करते हैं और कभी भी हार्टअटैक नहीं होता।रुद्राक्ष को धारण करने वाला मनुष्य स्वयं शिव स्वरूप हो जाता है।

कालेज के निदेशक गजेन्द्र सिंह पुंडीर ने इसे जनजागरण अभियान बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि शीघ्र ही उनके शिक्षण संस्थान द्वारा फलदार पेड़ों के साथ साथ 500 रुद्राक्ष के पेड़ आगामी महाशिवरात्रि पर वितरित किए और लगाए जाएँगे।उन्होने कहा कि प्रकृति की सर्वश्रेष्ठ रचनाओं में एक पेड़-पौधे भी हैं जो सम्पूर्ण मनुष्यों,पशुओं और पक्षियों को भोजन उपलब्ध कराते हैं अतः इनका संरक्षण हर मनुष्य का कर्तव्य है।

कार्यक्रम में संयोजक सुरेश निझावन ,डॉ गौरव ठाकुर,डॉ विश्वकर्मा,अमित, जनेश्वर,भरत दहिया, सिद्धार्थ, रूप सिंह, अभिनव, शौर्य , आराधना , गुरु माँ अनीता जी, मनीषा धीमान, , श्रवण पांडे, विवेक जाधव,प्रदीप कुमार की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

पश्चिम प्रदेश आंदोलन में संतो का आर्शीवाद और उनका साथ भी जरूरी, विरेन्द्र चौधरी पत्रकार 8057081945

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